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क्या कॉर्पोरेट हायरिंग में भी कास्टिंग काउच है? (Is there a Casting Couch in corporate hiring too?)

आप इसे पहचानते हैं, सही कहा आपने,  हार्वे विंस्टिन, मशहूर हॉलीवुड फ़िल्म निर्माता...कास्टिंग काउच से विख्यात हुए.. किस्से हज़ारों.. कारनामें बड़े बड़े..  इस विषय पर कोई नहीं बोलता....गन्दा है पर धंधा...   मेरा ह्यूमन रिसोर्सेज (एच आर) फंक्शन में काम करने का अनुभव है, जब मैं मैनेजमेंट की पढ़ाई सिम्बी में कर रहा था, मेरी क्लास में कुछ ६० लोग थे. दो-चार विदेशी (थर्ड वर्ल्ड कंट्री के लोग, जिनके लिए इंडिया का सिम्बी जैसा एवरेज मैनेजमेंट का शॉप भी कैंब्रिज है). लगभग ४० लड़कियां, बाकी लड़के. कुछ ५ या ६ बैक डोर एंट्री वाले भी थे. एक पटना से भी था, जो बाद में जूनियर बैच में भेज दिया गया, क्योंकि पुणे यूनिवर्सिटी ने मैनेजमेंट कोटा में उसे जगह नहीं दिया. आज साहब KPMG में ह्यूमन रिसोर्सेज के डायरेक्टर हैं. बैक डोर एंट्री वाले, TCS America में रिसोर्स मैनेजमेंट यानि पोल्ट्री फार्मिंग कर रहे हैं. एक बैक डोर वाला, कई देश में चेंज मैनेजमेंट कर आया. कॉर्पोरेट वर्ल्ड का नंगा सच आपको मैनेजमेंट संस्थानों में ही दिख जाएगा। मतलबी, षड्यंत्रकारी , चौकड़ी बाज़. वहाँ  ...

कहते हैं, स्वर्ग भी मरने के बाद ही मिलता है!

२६ अगस्त के टाइम्स ऑफ़ इंडिया में न्यूज़ है, "३१ कंपनियों को IITs ने बैन कर दिया है. उन्होंने प्लेसमेंट की मर्यादा की माँ चो* दी है. ऑफर दे कर जोइनिंग नहीं दिया. फ्लिपकार्ट, ग्रोफर्स, जोमाटो, और ऐसे अनेकों नाम हैं. स्टार्ट उप फ़ैल हो रहे हैं. स्टार्ट उप फ़ैल होते हैं. लेकिन स्टार्ट उप तब तक फ़ैल नहीं होते जब तक वो, फिर से नयी जंग के लिए तैयार हैं हो जाते. रेलिअनेक ज्वेल फ़ैल होगया, टाटा, बिरला, के कई वेंचर फ़ैल हो गए. मर्ज हो गए, बिक गए, कबाड़ में गया. एयरलाइन कम्पनीज बंद हो गयी, बंद होना फेलियर नहीं है, हार जाना , हार मान लेना फेलियर है. सहादत मांगती है स्टार्ट-अप . किसी नें सच ही कहा है, स्टार्ट उप में, काफी समय, बिज़नस प्लान ही मिसिंग होता है. फंडिंग है, आईडिया है, मार्केटिंग है, स्ट्रेटेजी है. बिज़नस प्लान बना नहीं है.  सारी बात नीयत की है. अगर आप की नीयत अच्छी  है तो, बरक्कत होगी. इंशाअल्लाह! बात अर्रोगंस से शुरू होती है, अर्रोगंस से ख़त्म हो जाती है. कॉपी-पेस्ट को कोई स्टार्ट उप नहीं ,कहता! कॉपी -पेस्ट बुरा नहीं है, पर मॉडल तो चेक कर लो, जब क़यामत निश्चित...

अब कोई HR वाला न पूछेगा, ६-६ महीने में जॉब क्यों छोड़ते हो?

दोस्त -दोस्त ना रहा! सबको CHRO बनना है! जय  Cipla , जय  Piramal !  तू जहाँ जहां चलेगा, मेरा साया साथ होगा! कभी कभी ऊँगली पकड़ कर चलने वाला भी ठेंगा दिखा कर आगे निकल जाता है. जब आपका सगा ही दगा दे जाए तो समझ लीजिये, आपके करियर की शाम आ चुकी है. अब कोई HR वाला न पूछेगा, ६-६ महीने में जॉब क्यों छोड़ते हो? CHRO बनने की चूहा दौड़! चीफ टैलेंट ऑफिसर एंड हेड कॉर्पोरेट HR-देश की तीसरी बड़ी फार्मा कंपनी, जॉब स्टे ८ महीने. उसके पहले, चीफ टैलेंट अफसर, देश की सबसे बड़ी प्राइवेट diversified कॉर्पोरेट  - ,जॉब स्टे- १८ महीने. इतने उतावले क्यों हो भाई, टैलेंट मैनेज कर रहे हो या धनिया उगा रहे हो? इतने काम समय में तो आप अपना, स्वयं  का टैलेंट भी नहीं चेक कर पाते नयी कंपनी में. कॉर्पोरेट की हायरिंग माफिया के हाथ में चली गयी है लगता है. कुछ लोग इसका सूत्र ढूंढ चुके हैं. हैडहंटर अपना गेम खेल रहा है. हायरिंग ही जब हथकंडा हो तो टैलेंट तो  तिल्हनड्डे  में जाएगा ही. तनु वेड्स मनु का यह विडियो देख लीजिये! तिल...

HR की ज़िन्दगी जन्नत है. हनीमून की जगह

शिद्दत वाला HR ! मुझे याद है, २००१; जब मैं सिम्बायोसिस इंस्टिट्यूट ऑफ़ बिज़नेस मैनेजमेंट पुणे की MPM/MBA entrance test की इंटरव्यू के लिए गया था. GD स्टार्ट हुआ, मैं और एक सरदारजी , अंग्रेजी LOUDLY बक रहे थे. हम अग्रेसिव थे, आप बत्तमीज़ कह लीजिये। गलती हमारी नहीं हैं, हमें बताया गया था, ज्यादा बोलने को, औरों से मौका छीनने को, और ऐसे ही कुछ असंवैधानिक, असामाजिक प्रलाप. ग्रुप में काफी सज्जन और सलीकेदार , पढ़े-लिखे प्रतियोगी थे. हम दोनो ने उन्हें लगभग बोलने नहीं दिया. सीधे शब्दों में; हम ने उन्हें सुनने की बिलकुल कोशिश नहीं की, समझने की तो बात ही दूर की है. नतीजा? सरदार जी और मैं GD में सेलेक्ट हो गए, सभ्यजन बाहर. सरदारजी आज CHRO हैं, एक नामी बीपीओ में फिलिपींन्स में. ठीक हैं, बीपीओ और वह भी फिलीपींस में, आप कहेंगे , अंधों में कांना राजा. ढेले पर का भात! दूसरी कहावत कुछ रूढ़ देशी है. आप रहने दीजिये!  गार्टनर वाले कहते हैं, फार्च्यून २५० के CEOs  मानते हैं की उनके ५५% CHROs को बिज़नेस रणनीति नहीं समझ आती. उनके CFOs तो सिर्फ ३०% CHROs को इस काम के क़ाबिल स...

बदनाम बादशाह के हरम की हूरें!

बदनाम बादशाह के हरम की हूरें! एक फ्रेंच मल्टी नेशनल कंपनी के सीनियर मानव संसाधन मैनेजर ने अपने बायो डेटा में लिखा है- पहले आपको बता दूँ की मैं क्या करना चाह रहा हूँ. मैं एक षड़यंत्र का शिकार हूँ. षड़यंत्र है- पिछले २ साल से  मानव संसाधन में नौकरी ढूंढ  रहा हूँ, ५०० कंपनियों में अप्लाई कर चूका हूँ पर कोई इंटरव्यू नहीं. मैं SIBM पुणे से MBA  हूँ और पिछले १३ साल में कुछ अच्छी MNC कम्पनीज़ में काम कर चूका हूँ. मुझे लगता है, कोई बड़ी बीमारी लग गयी है जॉब मार्किट को. IIT और IIM वाले भी, कई बार,  मजबूरी में start up कम्पनीज का रुख कर रहे  हैं. नतीजा साफ़ है. MNC companies इंडिया में अपने डिक्लाइन की ओर अग्रसर है. क्या कोई षड़यंत्र है? आइए जाँच शुरू करते हैं- कई लोगों का मानना है. MNC एवरेज लोगों का अड्डा सा बन गया है. एवरेज और insecure managers  एंड सीनियर managers कमज़ोर और नपुंसक, लोगों को hire कर रहे हैं. इतना ही नहीं, ये इनको संरक्षण भी दे रहे हैं. "बस एक ही उल्लू काफी था, बर्बाद गुलिश्तां करने को! हर शाख पर उल्लू ...

Workplace Abuse को कहो, "इसकी माँ की!

कुछ स्टार्ट  उप के फाउंडर्स , managers "fuck" , "fucked "इत्यादि शब्द का इस्तेमाल ऐसे करते  है जैसे इसके बगैर उनकी  उत्पत्ति  पर प्रश्न चिन्ह लग जाएगा. मैं इनसे पूछना चाहता हूँ कि बगैर वियाग्रा (वीमेन वियाग्रा भी अब उपलब्ध है) के आप ३ मिनट नहीं चल पाते, ८ और ९ इंच आपके लिए सपना है और दिन में ३० बार अपनी टीम, क्लाइंट्स के सामने, ऑफिस बॉय और महिलाओं , बच्चिओं के सामने, अपने से उम्र और अनुभव में काफी ज्यादा लोगिन के सामने आप "fuck " चालीसा के माध्यम से क्या बताना चाहते हैं?  कि आपकी उत्पत्ति किसी विशेष प्रक्रिया से हुई है या फिर जो कुमार विश्वास कहते हैं प्रेम के बारे में, जब उनके मित्र और कवि सम्पत शरण जी प्रेम करने वालों का उपहास करते हैं. "जिनसे कुछ नहीं हो पाया होता है, वे ही ज्यादा "पुराण" बांचते हैं. मैंने दोस्तों से सुना है जो स्टार्टअप में काम करते हैं या कर चुके हैं, की उनकी फाउंडर्स मीटिंग में "fuck " शब्द का प्रयोग टीम पर अपनी बोस्सिसिम साबित करने के लिए या फिर अग्रेशन दिखाने के लिए या फिर ट...

एम्प्लोयी वेलफेयर का सुलतान, flipkart महान.

यह HR वाले करते क्या हैं? सवाल जायज है.  यह सवाल उतना ही पुराना ही जितनी की हमारी सभ्यता है. लेकिन आपके मैं यकीन दिलाना चाहता हूँ कि आईआईएम के बच्चों को शूली पर चढाने वाले HR वाले नहीं हैं. यह उनके आका IIT वाले व्यापारी हैं. अभी flipkart का IIM ऑफर फ्लिप चर्चा में है. शायद १८ ऑफर्स पर  गाज गिर रही है. मुआवज़ा है डेढ़ लाख ६ महीने बाद जब जोइनिंग होगी. इसमें भी चालाकी. आप यह तो मानेंगे , HR वाले इतने चालाक नहीं हैं. यह भी बिज़नेस आका का ही फरमान है. HR सिर्फ अंग्रेजी बोलेगा और बाकी उन्हें IIT वाले बॉसेस बताते रहेंगे कि क्या और कितना बोलना है. अब आपके पास मिलियन डॉलर वाले HR वाले हैं. HR में एक लम्बी फौज है. क्या आपको लगता है HR ने यहां कोई निर्णय लिया होगा? नहीं. उन्हें यह बता दिया गया होगा , "जोइनिंग डिले करना है, IIM को ईमेल लिख दो. बिज़नेस रीज़न बता दो. यह आदेश तो एडमिन असिस्टेंट को भी दिया जा सकता था. पर HR वाले होते किस लिए हैं. HR वालों को यह सब हैंडल करना बड़ा की सनसनी ख़ेज़ लगता है. ऐसे समय में, स्वनाम धन्य HR वाले अपने आप को बड़े काम की चीज़ समझने लगते हैं...