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Showing posts from 2020

दूसरी ज़मात

यह तश्वीर उन सिगल्स की स्थिति को दर्शाती है जो अपनी हीन भावना से ऊपर नहीं उठ  सके. एच आर में एक लम्बी फौज है जो कुलवधुओं के वेश में वेश्याएं हैं. यह विश्लेषण कई पुरुषों पर भी सामान्य रूप से लागू  होता है. यह एक विचार है, एक मानसिकता जो सभय्ता की लाश नोचते से नज़र आते हैं. सच, हम कलयुग में जी  रहे हैं.  अब आते हैं मुद्दे पर.. दूसरी जमात क्या हैं?  नौकरी जा सकती है, बिज़नेस फेल होते हैं. कई लोग कंगाल हो जाते हैं कई बच जाते हैं... उन्हें सहारा मिल जाता है.  दूसरी ज़मात उन लोगों की है जो पहले से ही फ्रॉड हैं. जब मैं पी सी एस टेक्नोलॉजी में काम करता था तब एक रिक्रूटर इंटरव्यू देने आया। .उसे हमारे मल्लू जोनल मैनेजर की 'माल' (इस मल्लू माल की चर्चा हम बाद में करेंगे) ने अपने कंसल्टेंसी से भेजा, हमारे यहां के रिक्रूटर पोजीशन के लिए.  लड़का मध्य प्रदेश के किसी जगह से एम् सी ए की पढाई करके आया था।  कहीं कोई रिक्रूटमेंट कंपनी में काम कर रहा था, पता नहीं वह भी सही इनफार्मेशन था या फेक रिज्यूमे मात्र. . माल का कैंडिडेट था सो बहाल हो गया. ऐसी कंपनी में प्रीमियर बी स्कूल के बाद हम बहाल हुए थे, बह

क्या इन सज्जन को कोरोना हुआ है?

करोना से पहले की तश्वीर ऊपर है , कोरोना की नीचे ! पहले बाहर का मजा, अब घर में ही हलवाई बनने का अवसर ! मासूम सवाल: इन सज्जन को क्या परेशानी है भाई? जवाब: इनको कोरोना हुआ है! कुछ लोग कोरोना को करोना बोल रहे हैं. करोना देश से निकले न निकले, देश करोना से निकल ही जाएगा. पर फँस जाएँगी कुछ कम्पनियाँ। वो भी कैसे बताएँ कि अब उनको कोरोना हुआ है ? यह पीरियड शेम जैसा ही है. व्हिस्पर का कॉन्फिडेंस कैसे मिले इन कंपनियों को? धंधा जड़ों से हिल चुका है. क्लाइंट का भी वही हाल है. क्लाइंट को कॉन्ट्रैक्ट कैंसिल करने की जल्दी है. वेंडर पेमेंट के लिए हज़ार व्हाट्सप्प मैसेज कर चुका है, ऑफिस का किराया बाकी है. एम्प्लोयी ज़ूम मीटिंग में सैलरी मांग रहे हैं। इन्वेस्टर चेक नहीं दे रहा. यह तो हाल है, आइंस्टीन लोगों के स्टार्ट-अप का. छोटी कम्पनियाँ जो अन्य छोटी कंपनियों के भाग्य से जीवित थीं, अब आस छोड़ चुकी हैं. ३०% दुकान, कारोबार, खुल भी पाएंगे, इसमें संदेह है. सरकार मुआवज़ा देगी, फिर हिसाब-किताब चुकता करके मालिक फारिक होंगे। रही बात मध्यम दर्जे की भारतीय कंपनियों की, तो अब ये,  "कामचोर पकड़ो , आंदोलन चला