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Showing posts from July, 2016

अब कोई HR वाला न पूछेगा, ६-६ महीने में जॉब क्यों छोड़ते हो?

दोस्त -दोस्त ना रहा! सबको CHRO बनना है! जय  Cipla , जय  Piramal !  तू जहाँ जहां चलेगा, मेरा साया साथ होगा! कभी कभी ऊँगली पकड़ कर चलने वाला भी ठेंगा दिखा कर आगे निकल जाता है. जब आपका सगा ही दगा दे जाए तो समझ लीजिये, आपके करियर की शाम आ चुकी है. अब कोई HR वाला न पूछेगा, ६-६ महीने में जॉब क्यों छोड़ते हो? CHRO बनने की चूहा दौड़! चीफ टैलेंट ऑफिसर एंड हेड कॉर्पोरेट HR-देश की तीसरी बड़ी फार्मा कंपनी, जॉब स्टे ८ महीने. उसके पहले, चीफ टैलेंट अफसर, देश की सबसे बड़ी प्राइवेट diversified कॉर्पोरेट  - ,जॉब स्टे- १८ महीने. इतने उतावले क्यों हो भाई, टैलेंट मैनेज कर रहे हो या धनिया उगा रहे हो? इतने काम समय में तो आप अपना, स्वयं  का टैलेंट भी नहीं चेक कर पाते नयी कंपनी में. ये कॉर्पोरेट की हायरिंग माफिया के हाथ में चली गयी है लगता है. कुछ लोग इसका सूत्र ढूंढ चुके हैं. हैडहंटर अपना गेम खेल रहा है. हायरिंग ही जब हथकंडा हो तो टैलेंट तो  तिल्हनड्डे  में जाएगा ही. तनु वेड्स मनु का यह विडियो देख लीजिये! तिल्हनड्डे का मतलब साफ़ हो जायेगा. क्या वजह है कि CHRO लोग अपने बावर्ची, नौकर, ड्राइवर की तरह चीफ

HR की ज़िन्दगी जन्नत है. हनीमून की जगह

शिद्दत वाला HR ! मुझे याद है, २००१; जब मैं सिम्बायोसिस इंस्टिट्यूट ऑफ़ बिज़नेस मैनेजमेंट पुणे की MPM/MBA entrance test की इंटरव्यू के लिए गया था. GD स्टार्ट हुआ, मैं और एक सरदारजी , अंग्रेजी LOUDLY बक रहे थे. हम अग्रेसिव थे, आप बत्तमीज़ कह लीजिये। गलती हमारी नहीं हैं, हमें बताया गया था, ज्यादा बोलने को, औरों से मौका छीनने को, और ऐसे ही कुछ असंवैधानिक, असामाजिक प्रलाप. ग्रुप में काफी सज्जन और सलीकेदार , पढ़े-लिखे प्रतियोगी थे. हम दोनो ने उन्हें लगभग बोलने नहीं दिया. सीधे शब्दों में; हम ने उन्हें सुनने की बिलकुल कोशिश नहीं की, समझने की तो बात ही दूर की है. नतीजा? सरदार जी और मैं GD में सेलेक्ट हो गए, सभ्यजन बाहर. सरदारजी आज CHRO हैं, एक नामी बीपीओ में फिलिपींन्स में. ठीक हैं, बीपीओ और वह भी फिलीपींस में, आप कहेंगे , अंधों में कांना राजा. ढेले पर का भात! दूसरी कहावत कुछ रूढ़ देशी है. आप रहने दीजिये!  गार्टनर वाले कहते हैं, फार्च्यून २५० के CEOs  मानते हैं की उनके ५५% CHROs को बिज़नेस रणनीति नहीं समझ आती. उनके CFOs तो सिर्फ ३०% CHROs को इस काम के क़ाबिल समझते हैं. ९०% महिलाओं की चॉइस HR है.at

बदनाम बादशाह के हरम की हूरें!

बदनाम बादशाह के हरम की हूरें! एक फ्रेंच मल्टी नेशनल कंपनी के सीनियर मानव संसाधन मैनेजर ने अपने बायो डेटा में लिखा है- पहले आपको बता दूँ की मैं क्या करना चाह रहा हूँ. मैं एक षड़यंत्र का शिकार हूँ. षड़यंत्र है- पिछले २ साल से  मानव संसाधन में नौकरी ढूंढ  रहा हूँ, ५०० कंपनियों में अप्लाई कर चूका हूँ पर कोई इंटरव्यू नहीं. मैं SIBM पुणे से MBA  हूँ और पिछले १३ साल में कुछ अच्छी MNC कम्पनीज़ में काम कर चूका हूँ. मुझे लगता है, कोई बड़ी बीमारी लग गयी है जॉब मार्किट को. IIT और IIM वाले भी, कई बार,  मजबूरी में start up कम्पनीज का रुख कर रहे  हैं. नतीजा साफ़ है. MNC companies इंडिया में अपने डिक्लाइन की ओर अग्रसर है. क्या कोई षड़यंत्र है? आइए जाँच शुरू करते हैं- कई लोगों का मानना है. MNC एवरेज लोगों का अड्डा सा बन गया है. एवरेज और insecure managers  एंड सीनियर managers कमज़ोर और नपुंसक, लोगों को hire कर रहे हैं. इतना ही नहीं, ये इनको संरक्षण भी दे रहे हैं. "बस एक ही उल्लू काफी था, बर्बाद गुलिश्तां करने को! हर शाख पर उल्लू बैठा है ,अंजामें गुलिश्तां क्या होगा!" सन २००७ ने मेर