कॉर्पोरेट जंगल की एक लघु कथा, जिसमें किस्मत करवट लेती है और रिक्रूटर नटराज बन जाते हैं कॉर्पोरेट दुनिया में हर किसी की एक एक्सपायरी डेट होती है—बस फर्क इतना है कि किसी की डेट HR को पता होती है, और किसी की खुद को भी नहीं। कल पुराने सहकर्मी का फोन आया। आवाज़ में वही कंपन‑कंपन वाली हँसी—जो लोग PIP के बाद गार्डन लीव पर भेजे जाते हैं, वही हँसी हँसते हैं। चार साल तक अखंड सौभाग्यवती करियर चला। कंपनी ने 11 मई तक की सैलरी दे दी है, और बदले में कहा है— “भाई, अब ऑफिस मत आना। हम भी खुश, तुम भी खुश।” अब बेचारे सीनियर रिक्रूटर को नई नौकरी ढूँढनी पड़ेगी। पिछली चार नौकरियाँ तो उनके पुराने बॉस ने जुगाड़ से दिला दी थीं। लेकिन इस बार बॉस खुद ही बेरोज़गार हैं—तो जुगाड़ भी गार्डन लीव पर है। 🌱 कंपनी का कल्चर: जहाँ DNA मैच हो जाए, वही लकी है कॉर्पोरेट में सर्वाइवल एक ही चीज़ पर निर्भर करता है— आपका DNA कंपनी के DNA से मैच करता है या नहीं। काम, टैलेंट, मेहनत—ये सब तो LinkedIn पोस्ट के लिए होते हैं। कुछ लोग फिट हो जाते हैं, कुछ लोग फिट कर दिए जाते हैं, और कुछ लोग… फिट‑फाट हो जाते हैं। 🧮 र...
कॉर्पोरेट दुनिया में एक पुरानी कहावत बड़ी सटीक बैठती है — “बकरे की अम्मा कब तक खैर मनाएगी।” कल एक पुराने सहकर्मी का फोन आया। आवाज में हल्की सी थकान और थोड़ी सी हंसी मिली हुई थी। कंपनी ने आखिरकार उन्हें PIP (Performance Improvement Plan) की पवित्र अग्नि से गुजारने के बाद गार्डन लीव पर भेज दिया है। ११ मई तक की सैलरी कंपनी देती रहेगी, लेकिन अब ऑफिस आने की ज़रूरत नहीं है। कॉर्पोरेट भाषा में इसे कहते हैं — “सम्मानपूर्वक विदाई” । चार साल तक करियर अखंड सौभाग्यवती की तरह चलता रहा। लेकिन कॉर्पोरेट विवाह भी आखिरकार कभी-न-कभी तलाक की दहलीज़ तक पहुँच ही जाता है। इस सीनियर रिक्रूटर को अब नई नौकरी ढूँढनी पड़ेगी। दिलचस्प बात यह है कि उनकी पिछली चार नौकरियों में एंट्री एक ही पुराने बॉस की कृपा से हुई थी। कॉर्पोरेट दुनिया में इसे नेटवर्किंग कहते हैं, जबकि आम भाषा में इसे जुगाड़ कहा जाता है। पर इस बार समस्या यह है कि वही बॉस खुद नौकरी से बाहर हैं। इसलिए मैंने ईश्वर से प्रार्थना की — पहले अनीश भाई को नौकरी मिल जाए, ताकि वे वैभव भाई को फिर से नौकरी ऑफर कर सकें। आप भी “आमीन” कह दीजिए। कॉर्पोरेट जीव...