Tuesday, November 16, 2021

सिद्धि प्रत्येक मनुष्य का कर्त्तव्य है--पुरुषार्थ की आहूति.

महीने का राशिफल, साप्ताहिक राशिफल, ग्रह गोचर, नक्षत्र गोचर, ग्रहण , मार्गी और वक्री, इतना कुछ है भविष्यफल में. यूट्यूब पर कितने वीडियोस देख कर अब यह समझ आया है कि , स्वयं या मित्र राशि में गोचर तो अच्छा , मित्र या स्वयं के नक्षत्र में गोचर तो अच्छा, दुस्थान में गोचर तो मुश्किल, गोचर में युति का अपना ही असर। . सीधे फार्मूले से चलें तो आसान है भविष्यफल कह देना , लगभग हर घर के कारकत्व १० से ५० तरीके के हैं, उसी तरह ग्रहों के भी कारकत्व हैं, फिर गोचर के बाद दृष्टि का भी कथन, वहाँ भी वही हिसाब। .पर होता है क्या ऐसा कुछ?





नहीं, यह तुक्का है. दशा सर्वोपरि है. वैसे आप कहेंगे, गोचर से ही तो ढैया और साढ़े साती है। . बात सही है, पर क्या ढैया और साढ़े साती कोई सामान प्रभाव देते हैं ? नहीं. यहां  भी दशा महत्वपूर्ण है. 

अगर कुंडली मज़बूत है तो सब आंधी पानी से बेअसर , पर कुंडली कमज़ोर है तो ऊँट पर बैठे आदमी को भी कुत्ता काट जाता है। 

अब भाई हमने ३ तरह की बात कर ली; पहली गोचर, दूसरी दशा और तीसरी कुंडली की शक्ति। 

मुझे लगता है, इन तीन स्थितियों के अलावा जो बात फर्क ला सकती है वह है सन्यास या फिर किसी रिश्ते में फंस जाना। . अब क्या यह सब कुंडली में लिखा नहीं होता? होता होगा पर , आप भी कई बार ऐसा करते हैं जो कुंडली को चैलेंज करती सी लगती है. पर वह क्षणिक होता है , इसका परिणाम भी क्षणिक ही होगा , यह क्षणिक भाग्य भाग्य नहीं बदलता. भाग्य यदि बदलता ये संवारता है तो वह सेवा से , सच्चे गुरु की सेवा से , उनकी कृपा से। . 

अभी मैं डाक्टर नारायण दत्त श्रीमाली जी के कुछ पुराने वीडियो यूट्यूब पर देख रहा था. 


उन्होंने तंत्र, मंत्र और यन्त्र पर १५० से अधिक पुस्तकें लिखी हैं. हिंदी के प्राध्यापक रहे, संपूर्ण विश्वा में इसकी सिक्षा दीक्षा दी. हज़ारों साधकों को इनकी शक्ति और प्रभाव से परिचित कराया. 

उनकी अपनी ज़िन्दगी भी एक महान परिवर्तन की कथा है, मज़बूरी, दरिद्रता से मुक्त होने की और संपूर्ण समृद्धि प्राप्त करने की , और इन सभी परिवर्तन के पीछे उन्होंने शक्ति /काली/छिन्नमस्ता देवी की साधना को प्रभावी बताया है. 

सिद्धि हर मनुस्य का लक्ष्य होना चाहिए।  हनुमान चालीसा में हम यह कहते हैं, "अस्ट सिद्धि नव निधि के दाता , असवर दीन जानकी माता  ".. तो हम किन सिद्धियों की बात कर रहे होते हैं? (शास्त्रों में बताया गया है कि माता सीता ने हनुमानजी को आठ सिद्धियों और नव निधियों का वरदान दिया था..)

८ सिद्धियां हैं; --अणिमा , महिमा, लघिमा, गरिमा तथा प्राप्ति प्राकाम्य इशित्व और वशित्व ये सिद्धियां "अष्टसिद्धि" कहलाती हैं।

इनके अलावा हम सभी ने दस महा विधाएँ सुन रखी हैं. वे क्या हैं? 

The 10 Mahavidyas are काली  Kali, तारा  Tara,त्रिपुर सुंदरी   Tripura Sundari (Shodoshi), भुवनेश्वरी  Bhuvaneshvari, त्रिपुर भैरवी  Tripura Bhairavi, छिन्नमस्ता  Chhinnamasta,धूमावती  Dhumavati, बगलामुखी  Bagalamukhi,मातंगी  Matangi and कमला  Kamala

साधना सीखने के लिए एक सिद्ध गुरु के दर्शन और आशीर्वाद की आवश्यकता रहेगी।  

सिद्धि प्रत्येक मनुष्य का कर्त्तव्य है -यह उपाय नहीं पुरुषार्थ की आहूति है. आइये साधना मार्ग पर चलते हैं. 



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