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१२वें घर से आज़ादी

 १२वें घर से आज़ादी ! इस अजीब से शीर्षक से आप कन्फूज़ हो गए क्या? 

कुंडली का १२वां घर मुक्ति का घर है, जन्म-मृत्यु के कुचक्र से आज़ादी का ! 

अब इस घर को समझते हैं, यह घर किस राशि का है, उसका स्वामी कौन हैं , उसके साथ कौन हैं, वह किस राशि में बैठा है, उसपर और उसके १२वें घर पर किसकी दृष्टि है, इत्यादि. सब तय करेंगे कि आप की सज़ा कैसी होगी, किन कर्मों में आपका इस्तेमाल होगा और कहाँ आप सजा जैसा महसूस करेंगे. १२वां घर कोई रिवॉर्ड नहीं है. बचा काम है, पूर्व कर्म का निदान है, भूल-चूक- लेनी-देनी ! मुक्ति का स्थान,  आसानी से नहीं छोड़ेगा.. 

अब आते हैं अपने/मेरे १२वें घर पर, यहां मेष राशि है. इसका स्वामी तीसरे घर में है , नीच का और अस्त भी, सूर्य और अपने शत्रु बुध के साथ. १२वें में शनि है, नीच का और २९ डिग्री पर. न्याय के देवता , न्याय (अंतिम न्याय) के घर में हैं, उनपर गुरु की दृष्टि है, अर्थ है, न्याय तो पूर्व कर्मों का खूब होगा. और न्याय घर से ही शुरू होगा, मतलब, शनि पहले अपने घरों का न्याय करेंगे; यानि, भाग्यभाव और कर्म भाव का. वहाँ आपकी बजा -बजा के ली जायेगी. दूसरा न्याय , १२वें घर के स्वामी भी करेंगे. अब तो वे नीच के और अस्त भी हैं, अब उनका घर रहा सातवां भी. पार्टनरशिप, विवाह और व्यापार पर भी मुश्किलें. वैसे भी मंगल कारक हैं ; भूमि, भवन, वाहन के, इनकी भी ली जायेगी. सो ली गयी. भूमि, भवन, वाहन, सब से वंचित.

अब पर गुरु की भी दृष्टि हो तो फिर, दोनों प्रकार की सजा मिलेगी. यानी, पहले कड़ी सजा , फिर न्याय भी गुरु की कृपा भी. यानी , सभी कड़ी सजा पूरी होने के बाद न्याय भी मिलेगा, गुरु अपना फल भी देंगे, यानि, अचानक लाभ, विदेशों से लाभ, विदेशों से ज्ञान, विदेशों से ख्याति, विदेशों से ज्ञान का संपर्क. शायद सुखद अंत. हैप्पी एंडिंग.

किसी महान ज्योतिषी ने कहा था, मेरी कुंडली में पूर्व जन्म का काफी कर्मा है, और चुकि गुरु ६ठे में बैठे हैं तो आप बच नहीं सकते. कोई दवा, तंत्र, ताबीज़ काम नहीं करेगी. भोगना पड़ेगा. मुझे लगता है, ५१ साल हो गए, काफी भोग लिए हैं अब तक. अब तो कम दो कष्ट/ .. अब आगे शनि की साढ़े साती है, जो अप्रैल  २०२२  से दुसरे चरण में चलेगी, कर्मभाव से.. तो शायद कुछ रहत मिले. तब फिर गुरु भी साथ होंगे शनि महाराज के दशम में। . 

राहु महाराज भी २०२२ में अप्रैल में १२ वे में होंगे. मेरे विचार से, १२ वां भाव विदेश का है और राहु भी विदेश को दर्शाता है, तो क्या विदेश के अवसर मिलेंगे अगले साल? 

सजा कब तक चलती रहेगी, पता नहीं पर शनि महाराज मकर से निकलें तभी कुछ नरम होंगे, देखिये क्या होता है. 

अब यदि, दुसरे किसी व्यक्ति की कुंडली देखें १२वें भाव से तो क्या मिलता है? शनि , शुक्र, सूर्य और बुध यदि १२वें में हों , कर्क में और चन्द्रमाँ लग्न में हो मंगल के साथ।  क्या सजा होगी? गुरू दशम में हैं. 

ऊपर के सिद्धांत से, शनि पहले अपने घरों का न्याय  देंगे: ६ठे और सातवें का..यानी, रोज़ का काम , काफी करना पड़ेगा, रोग, ऋण, शत्रु से भी भय और उसका हिसाब देना होगा, शनि और गुरु, दोनों की द्दृष्टियाँ छठे घर पर हैं , सो मामला बैलेंस होगा, दोनों अच्छा फल देंगे. सूर्य और चंद्र का राशि परिवर्तन भी है, सो दोनों अच्छे फल देंगे. सूर्य लग्न का स्वामी है और चंद्र खर्चों का. चंद्र अपने घर से दुसरे में है सो धन लाभ देगा, सूर्य अपने घर से १२ वे में है सो खर्चे बढ़ाएगा पर चंद्र धन देते रहने को होगा बाध्य क्योंकि डिस्पोसिटोर हैं एक दुसरे के. सपोर्ट तो करना ही पड़ेगा. शुक्र १२वें में, विलासिता में खर्च , बुध १२ वे में , बच्चों में, शेयर मार्किट में खर्च। . बुध अपने घर से दुसरे और ग्यारवें  में बैठा है, आमदनी का स्वामी खर्चे के घर में, इन्वेस्टमेंट के घर में और हानि के घर में... इन्वेस्टमेंट कुछ ख़राब भी होंगे. धन भाव का भी स्वामी बुध है तो इन्वेस्टमेंट, इनकम और धन सभी एक दुसरे का साथ देंगे. धन अर्जन कर्मा है, विलासिता और निवेश कर्मा है, शरीर की छति कर्मा है. मुक्ति मिलेगी धन कमाने से, धन संचय से, विलासिता में खर्च से, योगकारक मंगल लग्न में चंद्र के साथ, सुख भाव, पत्नी एवं व्यापार भाव, और मृत्यु भाव, विदेश भाव, आध्यात्म भाव, को दृष्टि दे रहे हैं, सुख भाव उनकी अपनी राशि है, अष्टम भाव स्वामी गुरु दशम में हैं. यानी करियर का विदेशों से जुड़ना या अचानक परिवर्तन और लाभ संभव है परन्तु, दोनों ही ज्ञान से सम्बंधित होंगे. दोनों ही कामों में जातक निष्ठां पूर्वक काम करेगा. वृष राशि में गुरु ज्ञान को प्रैक्टिकल स्वरुप देंगे. 

कैसा लगा आपको यह विश्लेषण,  बताइयेगा कमेंट में.. 


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