Skip to main content

याद आ गये सुशांत !

अमेज़न प्राइम वीडियोस का शुक्रिया अदा करना चाहता हूँ! कल-परसों ही दो फ़िल्में देख ली।  "मित्रों " और "शुद्ध देशी रोमांस ". मिलनिएल्स के लिए और उनके समझ, सोच और ठरक पर बनी हैं ये फ़िल्में ! भाई ठरक दो प्रकार के होते हैं, जैसा कि सद्गुरु ने कहा है; एक जो आपको शरीर के निचले हिस्से की तरफ ले जाएगा और दूसरा ऊपर. बात समझ में आ गयी तो आपका ठरक अभी सही जा रहा है. मित्रों का एक डायलॉग ; "दुनिया में तीन तरह के लोग होते हैं; एक जो नौकरी करते हैं, दूसरे जो बिज़नेस करते हैं और तीसरे, जो कुछ नहीं करते। "
पर किसी शायर ने कहा है; "जो कुछ नहीं करते, वो अक्सर कमाल करते हैं"! अगर आप भी मेरी तरह कुछ नहीं करते तो फिर आप भी कमाल कर रहे हैं. गीता में श्रीकृष्ण ने कहा हैं; "जन्म, जरा, रोग और मृत्यु ये ४ शोक हैं! "
कुछ बच्चों के जन्म लेने से उनके माता पिता दबाव में आ जाते हैं तो कुछ के बड़े होने पर! मित्रों का हीरो एक बड़ा प्यारा सा सच्चा सा बच्चा है. कुछ नहीं करता! ऐसा उसके पिता सोचते हैं. माता और दादी (गुजराती में बा) के मत उनके पिता से बिलकुल भिन्न हैं. लड़का इंजीनियर है, दो दोस्त हैं, टपरी पर चाय पीता है, लड़कियाँ ताड़ता है. कभी-कभी दोस्तों के साथ दारू भी पी लेता है. पिता चाहते हैं, नौकरी कर ले. अपने पैरों पर खड़ा हो ले, पर वो है के बाकी लड़कों की तरह काम करने के लिए पैदा हुआ ही नहीं . काम भी है कि इससे जी चुराता है. पर भाई साहेब , ज़माने के तानों से तंग आकर उसने नौकरी कर ली. कॉल-सेंटर की नौकरी, बाज़ारू गर्लफ्रेंड, जो सहकर्मी भी है से इश्क़ की प्ले स्कूल के टोडलर सेशन्स की शुरुआत। सामजिक सबक, नौकरी से निकाला गया. न कभी नौकरी करने की हशरत थी , न निभाने की मजबूरी।  साहब को खाना बनाना अच्छा लगता है. एक कॉन्टिनेंटल रेस्टोरेंट में उनके एक  रैंडम कुकिंग पर शेफ की तारीफ़ और जनाब चले कुकिंग का यूट्यूब वीडियो बनाने. वैसे इनके कॉल-सेण्टर के फायरिंग का वीडियो यूट्यूब पर वायरल हो चुका था. यूट्यूब के लिए थोड़ी इंस्पिरेशन वहीँ से आयी थी. गौर करने की बात है कि आज का जनरेशन हुमिलिएशन में भी इंस्पिरेशन ढूंढ लेता है, देवदास नहीं हो जाता. करता अपने दिल की है. 

Comments

Popular posts from this blog

राम की शक्ति पूजा!-LEADERSHIP LESSONS

सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ आधुनिक हिन्दी काव्य के प्रमुख स्तम्भ हैं। राम की शक्ति पूजा उनकी प्रमुख काव्य कृति है। निराला ने राम की शक्ति पूजा में पौराणिक कथानक लिखा है, परन्तु उसके माध्यम से अपने समकालीन समाज की संघर्ष की कहानी कही है। राम की शक्ति पूजा में एक ऐसे प्रसंग को अंकित किया गया है, जिसमें राम को अवतार न मानकर एक वीर पुरुष के रूप में देखा गया है, राम  विजय पाने में तब तक समर्थ नहीं होते जब तक वे शक्ति की आराधना नहीं करते हैं। "धिक् जीवन को जो पाता ही आया है विरोध, धिक् साधन जिसके लिए सदा ही किया शोध!" तप के अंतिम चरण में विघ्न, असमर्थ कर देने वाले विघ्न. मन को उद्विग्न कर देने वाले विघ्न. षड़यंत्र , महा षड़यंत्र. परंतु राम को इसकी आदत थी, विरोध पाने की और उसके परे जाने की. शायद इसी कारण उन्हें "अवतार " कहते हैं. अवतार, अर्थात, वह, जिसने मानव जीवन के स्तर को cross कर लिया है. राम सोल्यूसन आर्किटेक्ट थे. पर सिर्फ  सोल्यूसन  आर्किटेक्ट साधन के बगैर कुछ भी नहीं कर सकता. साधन शक्ति के पास है. विजय उसकी है जिसके साथ शक्ति है.   जानकी! हाय उद्धार

लज़्ज़ानिवारण के लिए मखमली आवरण

काहे कि कल से बैंगलोर में लॉकडाउन है। .. दो हफ्ते का फिर से घर पर विश्राम। .  HRBP (जिनका नाम नित बदलता रहता है) कुछ कंपनी इसको पीपल पार्टनर कह रही है... मोटी  सैलरी पचाने के लिए मोटी चमड़ी भर काफी नहीं है.. आपको लज़्ज़ानिवारण  के लिए मखमली आवरण (अंग्रेज़ी में facade )भी चाहिए। ..सो सीरत बदले न बदले , नाम बदलते रहिये..  एक बात तो इनकी माननी पड़ेगी, इन्होने स्वीकार कर लिया है कि "बिज़नेस" इनके बूते का नहीं है सो नाम रख कर अपने आप को रोज़ शर्मिदा क्यों करें. "पीपल पार्टनर" सरल है...  इन पीपल पार्टनर्स के लिए गैंग्स ऑफ़ वास्सेय्पुर का यह सुपरिचित डायलॉग  प्रस्तुत कर रहा हूँ... लॉकडाउन में चखना जैसा काम करता है..  आपको नीचे JP की जगह PP (पीपल पार्टनर) पढ़ना है.. ..  चलते चलते बता दूँ कि यहाँ RS (रामाधीर सिंह ) बिज़नेस लीडर है। ..जिसके बार बार प्रताड़ित , लज़्ज़ित किये जाने के बाद CHRO ने HRBP का नाम बदलकर "People Partner कर दिया है..  RS (to JP):  Tum apni bhavnaaon ko daalo apni gaa#d me. Saala yahaan baithe baithe chhutwaiyaa netaaon, chhote chhote bachchon ki tarah netaa-gir

अब कोई HR वाला न पूछेगा, ६-६ महीने में जॉब क्यों छोड़ते हो?

दोस्त -दोस्त ना रहा! सबको CHRO बनना है! जय  Cipla , जय  Piramal !  तू जहाँ जहां चलेगा, मेरा साया साथ होगा! कभी कभी ऊँगली पकड़ कर चलने वाला भी ठेंगा दिखा कर आगे निकल जाता है. जब आपका सगा ही दगा दे जाए तो समझ लीजिये, आपके करियर की शाम आ चुकी है. अब कोई HR वाला न पूछेगा, ६-६ महीने में जॉब क्यों छोड़ते हो? CHRO बनने की चूहा दौड़! चीफ टैलेंट ऑफिसर एंड हेड कॉर्पोरेट HR-देश की तीसरी बड़ी फार्मा कंपनी, जॉब स्टे ८ महीने. उसके पहले, चीफ टैलेंट अफसर, देश की सबसे बड़ी प्राइवेट diversified कॉर्पोरेट  - ,जॉब स्टे- १८ महीने. इतने उतावले क्यों हो भाई, टैलेंट मैनेज कर रहे हो या धनिया उगा रहे हो? इतने काम समय में तो आप अपना, स्वयं  का टैलेंट भी नहीं चेक कर पाते नयी कंपनी में. ये कॉर्पोरेट की हायरिंग माफिया के हाथ में चली गयी है लगता है. कुछ लोग इसका सूत्र ढूंढ चुके हैं. हैडहंटर अपना गेम खेल रहा है. हायरिंग ही जब हथकंडा हो तो टैलेंट तो  तिल्हनड्डे  में जाएगा ही. तनु वेड्स मनु का यह विडियो देख लीजिये! तिल्हनड्डे का मतलब साफ़ हो जायेगा. क्या वजह है कि CHRO लोग अपने बावर्ची, नौकर, ड्राइवर की तरह चीफ