करोना से पहले की तश्वीर ऊपर है , कोरोना की नीचे ! पहले बाहर का मजा, अब घर में ही हलवाई बनने का अवसर ! मासूम सवाल: इन सज्जन को क्या परेशानी है भाई? जवाब: इनको कोरोना हुआ है! कुछ लोग कोरोना को करोना बोल रहे हैं. करोना देश से निकले न निकले, देश करोना से निकल ही जाएगा. पर फँस जाएँगी कुछ कम्पनियाँ। वो भी कैसे बताएँ कि अब उनको कोरोना हुआ है ? यह पीरियड शेम जैसा ही है. व्हिस्पर का कॉन्फिडेंस कैसे मिले इन कंपनियों को? धंधा जड़ों से हिल चुका है. क्लाइंट का भी वही हाल है. क्लाइंट को कॉन्ट्रैक्ट कैंसिल करने की जल्दी है. वेंडर पेमेंट के लिए हज़ार व्हाट्सप्प मैसेज कर चुका है, ऑफिस का किराया बाकी है. एम्प्लोयी ज़ूम मीटिंग में सैलरी मांग रहे हैं। इन्वेस्टर चेक नहीं दे रहा. यह तो हाल है, आइंस्टीन लोगों के स्टार्ट-अप का. छोटी कम्पनियाँ जो अन्य छोटी कंपनियों के भाग्य से जीवित थीं, अब आस छोड़ चुकी हैं. ३०% दुकान, कारोबार, खुल भी पाएंगे, इसमें संदेह है. सरकार मुआवज़ा देगी, फिर हिसाब-किताब चुकता करके मालिक फारिक होंगे। रही बात मध्यम दर...
लश्कर भी तुम्हारा है सरदार तुम्हारा है;तुम झूठ को सच लिख दो अखबार तुम्हारा है!-शायर विजय सोलंकी