कॉर्पोरेट के ल्युटियन्स लीब्रण्डू आपको बहुराष्ट्रीय कंपनियों में काफी मिलेंगे. यहां दो तरह के लोग हैं! एक तो वे जो कबीले के वासी हैं. मंगलौर ग्रुप, मलयाली ग्रुप, बंगाली ग्रुप, इत्यादि. ये काफी संगठित तरीके से काम करते हैं. इनके अपने कायदे हैं और टेरीटोरियल भी हैं ये. दुसरे को अपने ग्रुप में शामिल नहीं करते. बंगाली और मलयाली मैनेजमेंट कॉलेजेस के प्लेसमेंट टीम में भी खूब मिलेंगे. इनके शौक और आदर्श भी काफी सामान हैं. दुसरे वे जो प्रीमियर एजुकेशन ले कर आते हैं. यह कोई हेट स्पीच नहीं है, ये आइना दिखने की कोशिश है वहाँ जहां हम ऑस्ट्रिच की तरह सैंड में सर -गर्दन घुसेड़ चुके हैं. जब तक अपना काम बनता, भाड़ में जाए जनता. सभी लोग एक जैसे नहीं होते. सच बोलने की ज़रुरत है. यह रिस्क कौन लेगा? बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधेगा ? एचआर में बैंगलोर में आपको ये काफी मिलेंगे. ओवर कॉन्फिडेंस, अंग्रेजी और लिबरल, साथ साथ गज़ब के फट्टू , बेहद स्वर्थी। बंगालियों की सारी हेकड़ी बंगाल तक ही सीमित है, और फिर जेएनयू में. अन्य जगहों में ये अपनी औकात जानते हैं....चिक-चिक नहीं करते. इन ग्रुप्स ...
लश्कर भी तुम्हारा है सरदार तुम्हारा है;तुम झूठ को सच लिख दो अखबार तुम्हारा है!-शायर विजय सोलंकी