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फिलांथ्रोपिस्ट , सोशल सीईओ! | क्या बिज़नस वाली टेक वर्ल्ड में सोशल एंटरप्राइज की कोई बिसात नहीं?

आज मेरी एक आईटी सर्विसेज कंपनी के फाउंडर से बात हो रही थी ! कंपनी १५०-२०० लोगों की है. फाउंडर स्वयं टेक्नोक्रैट -टेक आर्किटेक्ट हैं. फिलांथ्रोपिस्ट , सोशल सीईओ ! अच्छे इंसान पर कहीं न कहीं अपने सोशल एंटरप्राइज की छोटी सी दुनिया में सिमटे और कुछ उलझे से भी. संवेदनाएं अपनों के लिए कहीं ज्यादा , संभावनाओं और भविष्य के लिए कुछ कम शायद.
सोशल एंटरप्राइज की मानसिकता कहीं न कहीं वेलफेयर स्टेट की स्वयंभू और सर्वजन हिताए, सर्वजन सुखाये की योजना लगती है. शायद इसे ही बायस कहते हैं. कई अच्छे सोशल सीईओ इस सोशलिस्ट फलसफा के ही शिकार हो जाते हैं.
बिज़नस एक रेस है जिसमे हारने वाले को कोई मैडल नहीं देता. जीतने के लिए दूसरों को शिकस्त देनी पड़ती है. बिज़नस को आकर्षक बनाने के लिए प्रॉफिटेबल बनाना पड़ता है. जब बड़ी और इंटेलीजेंट कंपनी आपको एक्वायर करना चाहे, आपके सीईओ और लीडर्स को मिलना चाहे, आपकी टेक /बिज़नस इंटरव्यूज को नोटिस करने लगे, समझ लीजिये आप अपने लोगों की ज़िन्दगी बदल चुके. सिर्फ वेलफेयर स्टेट लोगों को आश्रित बना देता है, कहीं निर्भर, बेचारा और असुरक्षित भी. क्या बिज़नस वाली टेक वर्ल्ड में सोशल एंटरप्राइज की कोई बिसात नहीं? 

जंग जीतनी है तो भीड़ नहीं , कमांडोज़ चाहिए, फॉलोवर्स कम लीडर्स ज्यादा चाहिए। लोगों को सक्सेस और लाइम लाइट पसंद है, टेक वर्ल्ड में अपनी भी कोई पहचान चाहिए तो , सीईओ और अन्य लीडर्स की छात्र छाया से निकल कर आगे आना होगा! संरक्षण और तुष्टिकरण लीडर्स नहीं, मजबूर और आश्रित जनसँख्या बनाते हैं.

रिले रेस जीतने के लिए सभी स्प्रिंटर्स लगते हैं.
६ सिग्मा बनने के लिए सारे स्टेप्स और लोग और टेक्नोलॉजी और लीडरशिप ६ सिग्मा ही चाहिए.
६ सिग्मा +३ सिग्मा +४ सिग्मा =३ सिग्मा और उससे भी बेकार क्वालिटी!
कहते हैं, शहर की ट्रैफिक का एवरेज -स्पीड सबसे धीरे चलने वाले वाहन तय करते हैं. 
बैंगलोर सिटी का ट्रैफिक एवरेज स्पीड ९ किलोमीटर प्रति घंटे है. कई कोर एरियाज में तो बैंगलोर ५ किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलता है. बैंगलोर का बेस्ट एवरेज स्पीड १८ किलोमीटर प्रति घंटे है.

लीडर को समझना होगा, तेज़ चलना पहली प्राथमिकता है!
तेज़ चलने का सबसे साधारण मतलब है, परिवर्तन. लोग सामान्यतया धीरे चलना चाहते है. जब तक आप चलते रहेंगे, आप भीड़ के साथ होंगे, जब तेज़ चलेंगे यानि दौड़ेंगे तो फिर भीड़ छट जायगी. 
परिवर्तन बाहर वाले लाते हैं. चेंज एजेंट, कैटेलिस्ट, उन्हें सम्मान से आमंत्रित कीजिये. उनका बेहद लिहाज़ कीजिये.
इसी बेहद लिहाज़ कीजिये से याद आ गए, रॉकस्टार शायर जॉन औलिया. इनको गौर से सुनिये ज़नाब !




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