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Showing posts from 2015

देखना है ऊँट किस करवट बैठता है

मानद उपाधियाँ आप भी ले सकते हैं.

दिलीप साब को पद्म विभूषण होम डिलीवर किया है राजनाथ सिंह ने. बधाई हो. ९३ वर्ष के हो गए हैं दिलीप साब. मुझे सबसे अच्छे लगे वो मशाल में.



इन उपाधियों से याद आया मानव संसाधन यानि HR वालों के कुछ उपाधियों का. एक संस्था हैं SHRM (इसका हिंदी ऑटो रूपांतर शर्म बता रहा है) यहां से आप कुछ उपाधि खरीद सकते हैं.. ऐसी दूसरी काफी सारी इंटरनेशनल संस्थाएं हैं जो HR की चूरन गोली , यानि सर्टिफिकेट बेचती हैं. ३०० डॉलर से ६०० डॉलर में आप चुटकुले टाइप ३ घंटे का एग्जाम लिख कर , ८ हफ़्तों में मानद उपाधि का टीका अपने बायो डेटा के सर पर लगा सकते हैं.
आजकल HR के उपाधि वाले अपने नाम के आगे लिखते हैं, PHR , SPHR , GPHR , HRMP ,इत्यादि.

कुछ HR के नए मुल्ले, अपने मंद उपाधि के बाद tagline लगाना नहीं भूलते..
कुछ ऐसे होते हैं ये चुटकुले नुमा tagline "Identified as top 20 future HR leaders by Peoplematters 'Are You in the List?'"
स्वनामधन्य एक HR की पत्रिका नें ये सूरमा लिस्ट तैयार किया है. फॉर्म भर दीजिये, लम्बी फेंक मारिये और आप बन गए, Identified as top 20 future HR leaders by Peoplematters 'Are You in…

सपने बुनते रहिये

सपने बुनते रहिये  ऊँचे ख़ाब देखते रहिये  काफी काम लोगों में है यह हौसला, इस रोशनी को जलाये रखिये  बस ख्याल इतना रखिये  पाओं को ज़मीन पर रखिये 
छोटी पटरियों पर फिसलने के हम नहीं कायल  करें कलरकी और ख़ुशी से फूल जाएँ, ऐसे भी हम नहीं घायल 
डरिये मत कि लोग इसे फलसफा कहेंगे  शब्द और संवेदना के ऐसे ग़रीब यहां ख़ूब मिलेंगे  अठंन्नी डालिये, अपनी राह चलते रहिये  भूल कर  भी इनसे ज्ञान मत लीजिये,  क़ाबुल से निकाले गए कई गधे यहां भी मिलेंगे. (जनवरी २००३ )

कभी जब शून्यता महसूश करता मैं

कभी जब शून्यता महसूश करता मैं, शायद तुम भी विस्मृत सी हो जाती हो. याद करता फिर तुम्हारा वह चंचल-कोमल सा चेहरा , उस चेहरे की ताज़गी और आँखों की चमक. कुछ कहते से होंठ और उनकी थिरकन. सब देखता हूँ मैं पर सुन नहीं पाता , क्या कहती हैं वे.  उन जीवंत आँखों और होठों को, और चेहरे से सामंजस्य बैठाने की कोशिश में मैं भी करने लगता प्रयास; आँखों में चमक लाने का, चेहरे से ओज छलकाने का, और प्रतिउत्तर देता सा अपने शिथिल होठों को हिलाने का, पर डरता और लज्जित सा भी महसूस करता अंदर-ही-अंदर कि शायद तुम समझ रही हो यह सारा अभिनय. पर क्यों करता हूँ यह अभिनय? शायद  इस लिए कि तुम्हारी अपेक्षाओं से दूर रह जाता हूँ मैं. पर फिर सोचता क्या हिमालय से निकली धारा उसका साथ कभी छोड़ पाती है? दूर-दूर, और दूर जा कर भी जुड़ी रहती है उसी दृढ़ता से, उसी चाहत से , उसी उत्साह और प्यार से. (जुलाई २०००)

ईश्वर अगर है और हो तुम मेरे साथ

संघर्ष करते हुए उदास हो जाता मैं, आशा छोड़ने लगती जब साथ, नज़र आता सिर्फ एक ही रास्ता, करते जाओ प्रयास, छोड़ो नहीं आश.  फिर भी धड़कन बढ़ती जाती है, दूरी और परिवेश भी जब करने लगते निराश, पर हूँ दृढ संकल्प, हार स्वीकार करने को हम तैयार, पर पूरा संघर्ष करने को हम बाध्य, प्रयाश से पूर्ण और निश्चय से दृढ़।   दौड़ते रहना मेरी नियति है, कुछ सफलताओं से आशान्वित होकर, फिर असफलता, फिर निराश.  आश-निराश के बीच झूलता मैं, मालूम नहीं, क्या होगी परिणति, पर है एक विश्वास.  कि ईश्वर अगर है और हो तुम मेरे साथ, पहुंचेंगे जरूर, असफलताओं को लांग सफलता के पास. (मई, २०००. )

इस बदबू में हम जी लेंगे!

Whatsapp पर जोक आया है; "कब्रगाह वो जगह है, जहां वे लोग दबे हैं, जो यह सोचते थे की उनके बगैर यह दुनिया नहीं चल सकती. "

कभी-कभी इस मुगालते में हम सब आ जाते हैं. परिवार, समाज, संस्था, कपंनी, हर जगह आपके ऐसे लोग मिल जाएंगे. 
कंपनी से बेहद खफा और निराश हो कर जब रिजाइन कर देंगे या इन्हे निकाल दिया जाएगा, तब भी ये अपनी अदा से बाज़ नहीं आते. 
समय के साथ , पढ़े लिखे बेकार बढ़ते गए. एमबीए कालेज बंद हो ते गए, आईआईएम वाले भी बेरोज़गार भटकने लगे. नौकरी डाट कॉम पर आईआईटी +आईआईएम को मैंने कोचिंग सेंटर में पढ़ाते देखा है, दिहाड़ी पर. 
अब तो प्रीमियर बी स्कूल वाले भी मिड लाइफ क्राइसिस में जाबलेस हैं. यह अच्छी स्थिति नहीं है. इनको तो हराम की नौकरी एक बार मिल गयी तो यह सरकार इस समाज का काम है की उनकी जमींदारी बानी रहे, चाहे कितने ही निकम्मे और कलंक क्यों न हों. 
मुझे यह हमेशा लगता रहा की अगर मैं ५०% सीनियर लोगों को काम से निकाल दूँ तो उनके कार साफ़ करने का भी काम कोई नहीं देगा. 

समय के साथ ऐसे लकी लोगों की संख्या बढ़ती ही जा रही है तो कंपनी पर बोझ बन गए हैं. दिमाग कुण्ड हो गया है. लोग उन्हें धरती का बोझ  स…

लीडर को लकी होना चाहिए।

गुरुचरण दास ने कहा , लीडर को लकी होना चाहिए।  मैं   गुरुचरण दास से १००%  सहमत हूँ. साथ ही ,मेरा मानना है सिर्फ किंग ऑफ़ गुड टाइम्स भी अपनी बरसी कुछ ही वर्षगांठों के बाद मना लेता है. लकी हैं तो होश में रहें। हुकूमत आपके होश गुम होने का ही इंतज़ार करती है.

सफल जीवन तीन आधारों पर टिका होता है; अवसर, सामर्थ्य या पुरुषार्थ और भाग्य।  ले दे कर सारी बात आ कर अटकती है भाग्य पर. आप भारत के प्रधान मंत्री बनें और तेल की कीमत विश्व बाजार में अपने न्यूनतम स्तर पर हो और बना रहे. अमरीकी राष्ट्रपति अपनी अंतिम कार्यकाल के अंतिम चरण में हों. मुख्य विरोधी पार्टी अपने जीवन के न्यूनतम स्तर पर हो. आपकी पार्टी में पुराने लीडर्स बिस्तर पकड़ चुके हों और नए वाले अभी तैयार नहीं हों.  आपकी चांदी है. किस्मत इसको कहते हैं. 

जीवन अवसरों और किस्मत से बनता और चलता है. आपकी लाटरी लगी तो लगी नहीं तो आप उसे रद्दी के टोकरे में डाल दें. फटेहाल स्टार्ट अप कंपनी कोम्मोन्फ़्लूर $२०० मिलियन में क्विकर नें अभी खरीदी है. सही वैल्यू क्या है यह किसको पता. जो कंपनी अपना दो रूपया फायदा नहीं बना सकी, उसको $२०० मिलियन में खरीदना कहाँ की अक…

टाइम पास- बेदाम-मिर्च और लाल वाला तीखा नमक

"सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है ज़ोर कितना बाज़ुए क़ातिल में है.  वक़्त आने दे बता देंगे तुम्हे ऐ आसमा, हम अभी से क्या बताएं, क्या हमारे दिल में है। " -राम प्रसाद बिस्मिल 


पीयूष मिश्रा जी कमाल के कलाकार हैं. मैंने उनको सबसे पहले गैंग्स ऑफ़ वास्सेयपुर में देखा था. थिएटर एक्टर करिश्मा करता है. उसे नहीं चाहिए ३ करोड़ का सेट, एक्सोटिक लोकेशंस और

जब मानवता शर्मसार हो जाती है, जब खून खौल जाता है

आपने आज का टाइम्स ऑफ़ इंडिया अखबार पढ़ा होगा. जी मैं २८ नवम्बर २०१५ की बात कर रहा हूँ.
 एक माँ, अपने नवजात को ले कर ईट भट्ठे से भागती है, अपने पति के साथ, दशकों की गुलामी से मुक्त होने के लिए. पकड़ी जाती है , ईट भट्ठे के मालिक के गुंडे उसे पकड़ लेते हैं और वह फिर झौंक दी जाती है २१ रुपये दिहाड़ी पर.
पर उसके दृढ़ निश्चय  उसे आशा की किरण देते हैं. CID का मानव तश्करी दस्ता और अंतर्राष्ट्रीय न्याय मिशन उसे बैंगलोर के पास रामनगर से मुक्त करा लेते हैं.
जब मानवता शर्मसार हो जाती है, जब खून खौल जाता है..
देश में हमारे आईएएस, आईपीएस ऑफिसर्स सारे डिस्ट्रिक्ट और ताल्लुके में तैनात हैं. उनकी नाक के नीचे स्वतंत्र भारत में, आईटी सिटी बैंगलोर के समीप मानव तश्करी होती है. इसे नपुंशकता कहेंगे या नौकरी बचाने के लिए अपनी आँखें बंद कर लेना या फिर भ्रस्ट तंत्र में शोषक के साथ हो लेना?
इन विषयों पर पार्लियामेंट में चर्चा क्यों नहीं होती? जीएसटी बिल अगर आवश्यक है तो यह उससे भी ज्यादा आवश्यक है कि स्वतंत्र भारत का पार्लियामेंट, सुप्रीम कोर्ट और सरकार में बैठे लोग यह सुनिश्चित करें कि भारत से गुलामी की प्रथा और उसक…

इंटरनेट पर चमकीली दुकान!

इंटरनेटपरचमकीलीदुकान. बेचतेसेवाऔरसामान, पसंदनाआयेतोरिटर्नपालिसीभीहै. अबकोई न कहेगा, बिकासामानवापसहोगाबदलाजाएगा. कॅशऑनडिलीवरीहै. मालदेखोफिरपैसेदो

बदलाक्याहै? फेरीवालातबभीघरपरआताथा, अबभीआताहै, सामानदेताहै