Skip to main content

Posts

Showing posts from March, 2018

खरबूजा, खरबूजे को देख कर रंग बदलता है. Leadership lessons learnt in trenches not classrooms!

 फिल्म रेड  एक जांबाज़ अफसर की कहानी है जो  अपना असर सब के मन मस्तिष्क पर छोड़ जाता है. कमाल  की बात तब होती है, जब, इनके साथी कर्मचारी जो वर्षों की गुलामी के बाद अपने अस्तित्वा को, अपनी ईमानदारी और निष्ठा को पा लेती है, अति गर्वित होकर, एक लीडर की वजह से , जिसने अपने और अपनों की जान की परवाह किये बगैर एक ऐतिहासिक  कहानी बना डाली, जिसपर आज ब्लॉक बस्टर  फिल्म बनी है.
रेड में एक लीडरशिप लेशन है जो संक्रामक है. इन्फेक्शस  जिसे अंग्रेजी में कहते हैं !
इस रेड ने  साधारण कर्मचारियों को  जीवन भर के लिए लीडर बना दिया. जबरदस्त परिवर्तन की कथा. 
मेरा मानना है कि : 
Leadership lessons are learnt in trenches not classrooms! What we learn in classrooms or over coffee with a high profile mentor or through talks by management experts, are not leadership things, they are just management tips. 
खरबूजा, खरबूजे को देख कर रंग बदलता है. मतलब क्या है? फिल्म रेड देख ली आपने? अगर  नहीं  तो देख लीजिये! मतलब समझ में तब आया जब, घूसख़ोर, और व्यवस्था से परेशान होकर जब, राजस्व /रेवेन्यू डिपार्टमेंट के मुलाज़िम जब पालतू से…

HR का मुल्लानामा! मुगालते में मत रहिएगा!

भक्ति काल के कवियों के बारे में आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने कहा था, यह बैठे ठालों का रोज़गार है. HR में अगर कहीं एक्शन है तो वह रिक्रूटिंग में है. ट्रेनिंग भी कथा वाचन है. नया एमबीए मुल्ला , कुछ थके हारे , उबासियाँ लेते ट्रेनी गण , एक वीरान सा ट्रेनिंग रूम, जिसमे ५० लोगों के बैठने की व्यवस्था है, पर कोईं ५ लोग ही ट्रेनिंग के लिए पकडे जा सके! बाकी लोगों को काम था या फिर अंतिम छन कोई ज़रूरी काम का बहाना बना कर कट लिए! एक्सएलआरआई वाला ट्रेनर (आपका नया मुल्ला ) ट्रेनिंग करता है, ग्रुफी  निकालता है, और फिर  चंद  शब्दों के अपडेट के साथ लिंकडिन पर चिपका देता है. श्री सत्य नारायण की सप्तम अध्याय की समाप्ति अब शंखनाद से नहीं होती, होती है ग्रुफी से ! भाई साब , इस फार्मा कंपनी में, एम्प्लोयी की  मीडियन सैलरी ३ लाख के आस-पास है, और एग्जीक्यूटिव की सैलरी इससे ४०० गुने अधिक, जैसा की २०१३ की कम्पनीज एक्ट नियामित डेक्लरेशन से २०१५ के फाइलिंग से पता चलता है. समस्या ४०० गुने या ४००० होने से नहीं है, है तो इससे कि एम्प्लोयी की मीडियन सैलरी ३ लाख है, यही कि कंपनी की आधी आबादी ३ लाख से कम की सैलरी में पूरे स…