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एमबीए इन राजनीति!

बिहार में नयी सरकार सत्ता में! कुछ लोग कह रहे हैं यह लालू की सरकार है और नितीश बस मुख्य मंत्री हैं।  ऐसा नहीं है, मैंडेट नितीश के लिए है. अलायन्स नितीश की वजह से, सुशासन , विकास और सुरक्षा का माहौल बनाये जाने की वजह से सफल है.  . वजह कुछ भी हो, बिहार के लोगों ने अपने पसंद की सरकार चुन ली है. लोकतंत्र की जीत है. मुबारकबाद देता हूँ. नितीश विकास करते रहेंगे, इसमें कोई संदेह नहीं है. युवा मंत्री भी बिहार की जनता के लिए अच्छा काम करेंगे. नीतीशजी अच्छे मेंटर एंड एडमिनिस्ट्रेटर है. 

मोदीजी के लिए भी एक चैलेंज रेडी है नेशनल लेवल पर. चेक एंड बैलेंस राजनितिज्ञों को संयमित रखता  है. बिहार के पास मौका है एक पीएम कैंडिडेट रेडी करने का. मोदी के गुजरात मॉडल के बाद  थर्ड फ्रंट के लिए बिहार का मॉडल बनना जरूरी है. हमें 80% विकसित राज्य चाहिए देश में, ५ नहीं २५ राज्य विकसित चाहिए . आल द बेस्ट नितीश! गुडलक बिहार!  .......... 

अबकी बारी पीएम बिहारी? क्यों नहीं? अगर इस रेस से देश का विकास होता है, देश जीतता है, लोग अच्छी ज़िन्दगी जीते हैं, तो क्यों नहीं? 

अगर हम सरकार चुनना सीख लें तो लोकतंत्र का सबसे ज्यादा भला होगा।  कुछ हद तक बिहार के रिजल्ट से इसकी शुरुआत हो गयी है. 

मज़ेदार बात है राजद का जेडी U से भी ज्यादा सीट जीतना! लगता है बीजेपी ने सारी ताक़त नितीश की पार्टी की  सीट्स पर लगा दिया और लालू सरकार हो गए! बाहरी हार ही गया! लिफ्ट में फंसे , अजय देवगुण का हेलीकाप्टर नहीं उतरा और लौट गया।  तांत्रिक वीडियो फेल हो गया , कुबेर का खजाना लुटाने और बोली लगाना फेल हो गया, मीडिया का आकलन, एग्जिट पोल फेल हो गए . लालू पास, तेजस्वी पास, तेज प्रताप पास, मोदी फेल. सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज और ने इसकी भविष्यवाणी पहले इतने एक्यूरेसी से कर दी थी। देखें।  Former Supreme Court Judge Justice Markandey Katju predicted with accuracy


भैया यह बिहार है, गुजरात का साङी बाज़ार  नहीं. 

सुशासन  पास, भाषण  फेल. 

 लालू जी के दोनों बेटे मंत्री हो गये. नीतीशजी मुख्यमंत्री हैं अपने अनुभवी मंत्रियों के बीच कुछ अप्प्रेन्टिसेस ट्रेनी मंत्रियों के साथ. नवी पास उप मुख्यमंत्री हैं. बच्चे में दम है. नीतीशजी की क्लास में अब फ्रेश स्लेट लोग भी हैं. दामन पाक साफ्. दिमाग साफ़, मैनेजमेंट ट्रेनी मंत्री. नीतीशजी अप्प्रेसन्टिस ट्रेनी आईएएस ऑफिसर्स की तरह अब मंत्री ट्रेनिंग अकादमी शुरू कर सकते हैं।  मैनेजमेंट कोटा में चिराग पासवान को भी एंट्री दे दें. राजनीति में दोस्त बनाते रहने चाहिए,  पता नहीं, कब दोस्त दग़ा दे जाये। साथ ही अच्छा मॉडल है "अकादमी ऑफ़ पोलिटिकल ट्रेनिंग". एमबीए की तरह दो साल का फुल-टाइम कोर्स शुरू करें. 


कुछ अनुभवी छुटभैये नेताओं  के लिए एमडीपी और पीजीपीएक्स एक साल का चला सकते हैं! 

शायद समय आ गया है की हम अब पॉलिटिक्स की बीए, एमए भीं प्रारम्भ कर दें. इसके दो फायदे हैं. १. राजनीति की कमान ,परिवार की sole प्रोप्राइटरी से निकल कर, सामान्य जन तक पहुँचेगा. अब नारा बदलेगा  , "डेमोक्रेसी ऑफ़ द पीपल, फॉर द पीपल। …से पोलिटिकल पावर ऑफ़ द पीपल , फॉर द पीपल, बाई द पीपल होगा! 
२. पोलिटिकल इंडस्ट्री में मीडिया मैनेजर , पोल मनगेर्स, कम्पैन मैनेजर , मार्केटिंग, ब्रांडिंग, ब्राडकास्टिंग पोलिटिकल  अनलिट्स, सोशल इंजीनियरिंग स्पैशलिस्ट , अपनी करियर तलाश कर सकेंगे. राजनीति में पहले जॉब क्रिएट करो. चमचों और परिवार से कब तक काम चलाओगे?

राजनीति कई नॉन पोलिटिकल बैकग्राउंड वाले लोगों के लिए भी एम्बिशन है. 
आईआईएम में भी अब पॉलिटिक्स का एमबीए  कोर्स शुरू हो जाना चाहिए. राजनितिक पार्टियों को अब कैंपस प्लेसमेंट सुरू करना होगा।  एंट्रेंस टेस्ट डिज़ाइन करना होगा, आरक्षण देना होगा! रिटायर्ड और राजनीति में असफल लोगों को, राजनीतिक पत्रकारों को फैकल्टी लेने के लिए प्रोसेस डिज़ाइन करना होगा! 
मानव संसाधन (HR ) वालों को भी काम मिल जाएगा. 

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