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नाम बड़े और दर्शन छोटे

आईआईएम कथा- झोला छाप डाक्टर (होम्योपैथिक-आयुर्वेदिक, इत्यादि) अब ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट हेड है. जिसने कभी किसी भी जाने-माने कंपनी में न काम किया, न टीचिंग , न कॉर्पोरेट का कोई अनुभव है जिसमे, उसे हम बना देते हैं, आईआईएम का ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट हेड. नाम के आगे डॉक्टर लिख लेने से आप ऐसा सोच सकते हैं की शायद Ph.D हो. आईआईएम का बेडा अब ये झोला छाप डाक्टर पार लगाएंगे. सरकारी पने की भी हद्द होती है.
उनकी अंग्रेजी पढ़ लीजिये उनके लिंकेडीन पर प्लेसमेंट सम्बन्धी पोस्ट में, आप को पता लग जाएगा , क्या लेवल है. इस व्यक्ति को एक नए आईआईएम (पहला बैच) का ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट हेड कैसे बना सकते हैं. यह कोई थर्ड ग्रेड इंजीनियरिंग कॉलेज नहीं है जहां आईटी सर्विसेज कंपनी टेक सपोर्ट के लिए हायरिंग करने आती है. लोकल थिंकिंग की भी एक हद्द होती है. यहां तो यही दिख रहा है, मालिक पंजाबी, HR हेड पंजाबी, मालिक मराठी, HR हेड, मराठी, इत्यादि। नियुक्ति हो रही है या रिस्तेदारी। अब तो शादी भी बिरादरी में नहीं, बराबरी में होती होती है फिर यह प्रांतवाद क्यों, क्या इस आईआईएम में सभी प्लेसमेंट करने वाली कम्पनियाँ बंगाली या मराठी भाषा में सारे काम करती हैं? आईआईएम को तो बक्श दो भाई..

अफसोस की बात तो यह है कि ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट डिपार्टमेंट सिर्फ एडमिन रह गया है, खाना-पानी, कमरा, कुर्सी की व्यवस्था, ट्रेनिंग गायब, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट नदारद, स्टूडेंट्स के प्रोजेक्ट में  वैल्यू ऐड शून्य. जो काम चपरासी कर सकते हैं, उसके लिए झोला छाप डाक्टर क्यों चाहिए फिर?

नाम बड़े और दर्शन छोटे

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