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आवश्यकता स्कॉलर्स की है, रिसर्च एसोसिएट्स की है

सुनील सर, आपके विचार अच्छे हैं पर इनको पूरा करने के लिए मानव संसाधन विभाग की आवशयकता नहीं हैं. आवश्यकता स्कॉलर्स की है, रिसर्च एसोसिएट्स की है. कोई मानव संसाधन का संस्थान ये दोनों नहीं बनाते. सिलेबस देख लीजिये, पचरंगा आचार लगेगा. एक ऐसा पेपर दिखला दीजिये XLRI या टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोशल साइंस से जो आपकी मानव संसाधन रिसर्च या स्कॉलर्स की श्रेणी में आता हो!

जैसा की राम चरण ने कहा : मानव संसाधन को दो भागों में बाँट देने की जरूरत है; मानव संसाधन एडमिन और मानव संसाधन -लीडरशिप आर्गेनाईजेशन. पहला चीफ फाइनेंसियल अफसर को रिपोर्ट करे और दूसरा चीफ एग्जीक्यूटिव अफसर को. जब तक ऐसा नहीं करेंगे, मानव संसाधन विभाग सामाजिक सरोकार ही निभाता रहेगा. पेरसोंनेल मैनेजमेंट वर्कर्स के लिए कमाल का काम करता था, हेल्थ एंड सेफ्टी, क्रेच, कैंटीन, ट्रांसपोर्ट, मैनेजमेंट-वर्कर नेगोसिऎसन बाई कलेक्टिव बार्गेनिंग, अप्रेंटिसशिप मैनेजमेंट, ट्रेनिंग , इत्यादि. ये सभी १००% ROI बेस्ड थे. किसी पर्सनेल मैनेजर को कभी २ और ४ करोड़ की सैलरी नहीं मिली. आज सेलिब्रिटी HR मैनेज करते हैं, जैसा आपने कहा डी (डेवलपमेंट) मिसिंग है. फिर हुआ क्या, सिर्फ धोखा, सिर्फ HR कंसल्टिंग आर्गेनाईजेशन के फंडों का कॉपी पेस्ट।  कंपनसेशन एंड बेनिफिट्स जो करता है, उसे देख कर आप सर पीट लेंगे, जॉब कोड मैचिंग, लेटर प्रिंटिंग, एक्सेल फाइल में बोनस कॉलम एडजस्टमेंट, रोउंडिंग ऑफ ऑफ़ डेसीमल फिगर्स. शर्मनाक. HCL का सैलरी स्लिप देखा अभी, HRA और बेसिक दोनों बराबर हैं. शर्मनाक। साल के दस दिन के काम के लिए कंपनसेशन एंड बेनिफिट्स वालों को पूरे साल की सैलरी मिलती है. वैल्यू ऐड-जीरो.

लर्निंग एंड डेवलपमेंट स्लाइड्स पढता है या फिर असेसमेंट फॉर्म्स भरवाते है. किसी भी महान लर्निंग एंड डेवलपमेंट वाले के बारे में ट्रैनीस की फीडबैक ले लीजिये, सच सामने आ जायेगा. आपने सच कहा, मिल्लेनिएल को आप डेलेवोप करना चाहते हैं, वो आपसे बेहतर डिग्री और एजुकेशन रखते हैं. मैंने पढ़े लिखे समार्ट एम्प्लाइज को HR के ऊपर बस जोक करते सुना है. ले देकर, ज्यादातर HR वाले, रिक्रूटमेंट कोऑर्डिनेशन करके नौकरी बचा रहे हैं. जंग लग चुका है, इस डिपार्टमेंट में, "स्पॉन्सर्ड कैंडिडेट" भर गए हैं, कोटरी (coterie ) बन चुके है. कोई प्रीमियर बी स्कूल नहीं, कोई रीसर्च नहीं, कोई Ph.D नहीं, कोई पेपर पब्लिश्ड नहीं, कोई केलेब्रटेड अचीवमेंट नहीं, पर बन गए ग्लोबल टैलेंट मैनेजमेंट एंड डेवलपमेंट हेड.

रेसेअर्चेर्स और स्कॉलर्स भरिये वरना बेडा तो ग़र्क़ हो ही चुका  है. CHRO , २ से १.५ साल में कंपनी बदल रहे हैं या फिर निकाल दिए जाते हैं. फिर वे अपने दोस्तों को नयी कंपनी में भर लेते हैं. शर्मनाक।

Reference- HR sitting on a time-bomb-HBR reviews.

यह भी पढ़ लें - https://www.linkedin.com/pulse/hr-dead-alive-mark-edgar
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