शारीरिक और मानसिक पीड़ा हो तो हीलिंग अनिवार्य है. वैद, डाक्टर , हस्पताल, दवाई चाहिए, सेवा चाहिए, समय , लोग, पैसे , धैर्य सब की आवश्यकता पड़ेगी। .. इलाज़ की कई पद्धतियां हैं , जितने विद्वान उतने विधा का अवतरण। .. सब की अपनी आस्था है। . मनीष भाई प्रेसेंसिंग थिएटर के सीनियर संचालक , कंसलटेंट हैं. इस पद्धति में पीड़ा को चित्रित किया जाता है, जैसी पीड़ा वैसी कलाकारी के साथ चित्रण एक नाटक जैसा. लोग जीते हैं उस पीड़ा को, समझते हैं और फिर उससे उबर पाते हैं.. पास्ट लाइफ रिग्रेशन हो या आकाषिक रिकॉर्ड पद्धति, सभी आपकी पीड़ा का मूल ढूढ़ते हैं. केतु पास्ट लाइफ को झलकाता है जन्मपत्रिका में, पांचवा घर आपका इंटुइशन है, सब के अलग अलग विधान हैं, सबके अलग अलग पुरोहित, पांडित्य और उससे जुड़े कई कर्मकांड। .. विधा देशी हो या विदेशी , सभी के मूल में वही खोज चल रही है, हम अस्तित्व में हैं तो पीड़ा की वजह भी वही अस्तित्व है, विधि का विधान है, जन्म, कर्म, जरा , मृत्यु और फिर वही चक्र. भोग का कर्म, फिर कर्म का भोग , यही चक्र है. शारीरिक, मानसिक बीमारी याद दिलाते हैं, आपका कर्मा है, भ...
लश्कर भी तुम्हारा है सरदार तुम्हारा है;तुम झूठ को सच लिख दो अखबार तुम्हारा है!-शायर विजय सोलंकी